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देहरादून API सम्मेलन में जोड़ों के दर्द से सार्कोइडोसिस तक, चिकित्सा जगत के दिग्गजों ने दिया समाधान

From Joint Pain to Sarcoidosis: Medical Stalwarts Offer Solutions at the Dehradun API Conference

 

देहरादून,3 मई 2026 : एसोसिएशन ऑफ फिजिशियंस ऑफ इंडिया (API), देहरादून शाखा द्वारा रविवार को एक वार्षिक सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया।

इस वर्ष सम्मेलन का मुख्य केंद्र ‘ऑटोइम्यून रूमेटिक रोग’ रहा

जिसमें रूमेटॉइड आर्थराइटिस (गठिया), एंकाईलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस, ऑस्टियोपोरोसिस और सार्कोइडोसिस जैसी जटिल बीमारियों पर गहन चर्चा हुई।

चिकित्सा जगत के विशेषज्ञों ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि ये बीमारियां अक्सर उपेक्षित रह जाती हैं

जिसके कारण मरीजों को सही समय पर सटीक इलाज नहीं मिल पाता।

दिग्गजों ने किया शुभारंभ

समारोह का उद्घाटन मुख्य अतिथि पद्मश्री डॉ. आर.के. जैन (निदेशक, सीएमआई अस्पताल) और डॉ. महेश कुड़ियाल (नवनिर्वाचित अध्यक्ष, आईएमए देहरादून) ने किया।

एपीआई देहरादून के अध्यक्ष डॉ. समीर स्वामी ने सभी आगंतुकों का स्वागत करते हुए सम्मेलन के शैक्षणिक महत्व पर प्रकाश डाला।

देश-दुनिया के विशेषज्ञों ने दिए व्याख्यान

सम्मेलन में चिकित्सा विज्ञान के नवीनतम शोधों पर चर्चा करने के लिए कई नामचीन विशेषज्ञ जुटे:

डॉ. रोहिणी हांडा (अपोलो अस्पताल): अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त डॉ. हांडा ने रूमेटॉइड आर्थराइटिस के आधुनिक उपचार विकल्पों को साझा किया।

डॉ. विनोद रविंद्रन: उन्होंने गर्भावस्था के दौरान ऑटोइम्यून बीमारियों के प्रबंधन जैसी जटिल चुनौती पर अपना व्याख्यान दिया।

डॉ. दीपक गोयल (जॉलीग्रांट): वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट ने पीठ दर्द और तंत्रिका संबंधी विकारों के अंतर्संबंधों को समझाया।

डॉ. वेंकटेश एस पाई (एम्स ऋषिकेश): उन्होंने एंकाईलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस और पीठ दर्द के उपचार की बारीकियां बताईं।

डॉ. सुनील कुमार मिश्रा (ग्राफिक एरा): उन्होंने ‘ऑस्टियोपोरोसिस’ के खतरों पर बात की, जो मेनोपॉज के बाद महिलाओं और बुजुर्गों की हड्डियों को कमजोर कर देता है।

डॉ. सुधांशु कालरा (संयोजक अध्यक्ष): उन्होंने ‘सार्कोइडोसिस’ जैसी दुर्लभ बीमारी पर रोशनी डाली, जिसे अक्सर गलती से टीबी समझ लिया जाता है।

मरीजों की जेब पर बोझ कम करने की अपील

सम्मेलन के समापन पर सभी विशेषज्ञों ने एक स्वर में सरकार और बीमा कंपनियों से मांग की कि गठिया जैसी आजीवन चलने वाली बीमारियों के महंगे इलाज को स्वास्थ्य बीमा (Insurance) के दायरे में लाया जाए।

विशेषज्ञों ने जोर दिया कि भारत जैसे देश में, जहां संसाधन सीमित हैं, डॉक्टरों को कम से कम जांचों के आधार पर सटीक नैदानिक (Clinical) पहचान कर जल्द इलाज शुरू करना चाहिए।

जुटाई एकजुटता

इस सम्मेलन में डॉ. एस.डी. जोशी, डॉ. कमल भट्ट, डॉ. के.जे.एस. सभरवाल और डॉ. आशुतोष माथुर सहित शहर के प्रतिष्ठित चिकित्सकों ने सक्रिय शिरकत की।

संगोष्ठी में न केवल फिजिशियंस, बल्कि न्यूरोसर्जन, स्त्री रोग विशेषज्ञ और अस्थि शल्य चिकित्सकों की उपस्थिति ने यह स्पष्ट किया कि जटिल बीमारियों के इलाज के लिए ‘टीम वर्क’ अनिवार्य है।

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