Uttarakhand

सदन में बढ़ती महंगाई का मुद्दा गूंजा,कांग्रेस विधायकों का वॉकआउट

देहरादून। विधानसभा में मंगलवार को पेट्रोल व डीजल की कीमतों में लगातार इजाफा होने और बढ़ती महंगाई का मुद्दा गूंजा। सदन में कांग्रेस विधायकों ने इस मामले में सरकार पर हमला बोला। जवाब में वित्त मंत्री प्रकाश पंत ने तथ्यों के आधार पर महंगाई के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। सरकार के जवाब से असंतुष्ट कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट किया।

विधानसभा में कार्य स्थगन प्रस्ताव रखते हुए नेता प्रतिपक्ष डॉ इंदिरा हृदयेश ने कहा कि महंगाई चरम पर है। मध्यम वर्ग, किसान, ट्रांसपोर्टर और मध्यम व्यापारी कराह रहा है। सरकार चुप्पी साधे बैठी है। बाजार में कच्चे तेल की कीमत 73 डालर प्रति बैरल है। सरकार बनने के बाद पेट्रोल-डीजल की एक्साइटज ड्यूटी में 12 बार वृद्धि हो चुकी है। सरकार का पेट्रोल और डीजल पर नियंत्रण खत्म हो गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष व विधायक प्रीतम सिंह ने कहा कि वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव और फिर 2017 में विधानसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी और भाजपा के शीर्ष केंद्रीय नेताओं ने पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को मुद्दा बनाया था, लेकिन केंद्र और प्रदेश में भाजपा की सरकारें बनने के बाद कीमतें घटाने से आंखें चुराई जा रही हैं।

विधायक गोविंद सिंह कुंजवाल ने कहा कि जनता को राहत देने के लिए सरकार को पेट्रोल-डीजल पर कर कम किया जाना चाहिए। वित्त, विधायी एवं संसदीय कार्यमंत्री प्रकाश पंत ने कहा कि राज्य सरकार ने बीते वर्ष ही पेट्रोल पर लिया जाने वाला पांच फीसद सेस माफ किया जा चुका है। महंगाई काबू में है।

उन्होंने बताया कि देहरादून में केंद्र की पिछली यूपीए सरकार के कार्यकाल में पेट्रोल की कीमत प्रति लीटर 74.94 रुपये और डीजल की कीमत प्रति लीटर 61.21 रुपये थी। वर्तमान एनडीए सरकार के कार्यकाल में उक्त कीमत में प्रति लीटर क्रमशः 4.40 रुपये और 6.44 रुपये का इजाफा हुआ है। उन्होंने दालों और तेल की कीमतें पेश करते हुए महंगाई बढने के आरोप नकार दिए। मंत्री के जवाब से खफा विपक्षी विधायक सदन से वॉकआउट कर गए। इससे पहले नेता प्रतिपक्ष डॉ इंदिरा हृदयेश ने मंगलवार सुबह सदन की कार्यवाही शुरू होते ही महंगाई के मुद्दे पर नियम-310 के तहत काम रोको प्रस्ताव पर चर्चा कराने की मांग की।

पीठ ने इसे अस्वीकार कर दिया। बाद में इस प्रस्ताव को नियम-58 में कार्य स्थगन प्रस्ताव के रूप में चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। हालांकि, नियम-310 में कांग्रेस के 11 विधायकों के हस्ताक्षरयुक्त प्रस्ताव को कार्य स्थगन के तहत स्वीकार करने पर विधायी एवं संसदीय मंत्री प्रकाश पंत ने आपत्ति की। उन्होंने कहा कि कार्य स्थगन प्रस्ताव पर मामले को सुने जाने पर विपक्षी विधायक एक से अधिक मामलों में कार्य स्थगन पर चर्चा नहीं कर सकेंगे। इसे लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच नोकझोंक भी हुई।

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