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स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय और मलेशिया की MSU के बीच अंतरराष्ट्रीय समझौता

International Agreement Between Swami Rama Himalayan University and MSU, Malaysia

देहरादून,23 अप्रैल 2026 : स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय (SRHU) ने वैश्विक शिक्षा और शोध की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए मलेशिया की प्रतिष्ठित मैनेजमेंट एंड साइंस यूनिवर्सिटी (Management and Science University) के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।

यह साझेदारी विशेष रूप से एसआरएचयू के ‘स्कूल ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंसेज’ (School of Pharmaceutical Sciences) के माध्यम से की गई है।

संयुक्त शोध और छात्र विनिमय पर जोर

इस समझौते के तहत दोनों संस्थान मिलकर संयुक्त शोध परियोजनाएं संचालित करेंगे।

साथ ही, फैकल्टी और छात्र आदान-प्रदान (Exchange Program) कार्यक्रमों के जरिए विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शैक्षणिक और सांस्कृतिक अनुभव प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

प्रमुख उपस्थिति एवं हस्ताक्षर

एसआरएचयू के अध्यक्ष डॉ. विजय धस्माना के दिशा-निर्देशन में आयोजित इस कार्यक्रम में:

SRHU की ओर से रजिस्ट्रार कमांडर वैकटेश्वर चल्ला (सेनि) और MSU मलेशिया के डॉ. मोहम्मद फदली असमानी ने आधिकारिक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए।

कुलपति डॉ. राजेन्द्र डोभाल ने इस सहयोग को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि वर्तमान में शिक्षा को वैश्विक दृष्टिकोण से जोड़ना अनिवार्य है,

जिससे स्वास्थ्य और फार्मा क्षेत्र में नवाचार (Innovation) को गति मिलेगी।

मधुमेह पर होगा विशेष शोध

डीन डॉ. प्रीति कोठियाल ने जानकारी दी कि दोनों संस्थानों के बीच एक विशेष आशय पत्र पर भी हस्ताक्षर हुए हैं।

इसके अंतर्गत उत्तराखंड और मलेशिया में मधुमेह (Diabetes) की व्यापकता, जन-धारणा और जीवन की गुणवत्ता पर इसके प्रभाव का एक तुलनात्मक अध्ययन किया जाएगा।

यह शोध सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण डेटा प्रदान करेगा।

भविष्य की योजनाएं

महानिदेशक (शैक्षणिक विकास) डॉ. विजेन्द्र चौहान ने विश्वविद्यालय के शोध कार्यों और भविष्य के रोडमैप को साझा किया,

जबकि MSU के दातो नशारुद्दीन शुकोर ने अपने संस्थान की वैश्विक पहचान और शोध गतिविधियों पर प्रकाश डाला।

इस अवसर पर प्रति कुलपति डॉ. ए.के. देवरारी सहित विभिन्न संकायों के डीन और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

यह साझेदारी न केवल विश्वविद्यालय बल्कि उत्तराखंड के शोधार्थियों के लिए भी अंतरराष्ट्रीय अवसरों के नए द्वार खोलेगी।

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