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( खास खबर ) IG संजय गुंज्याल की सूझबूझ से टला हरिद्वार महाकुंभ में अखाड़ों के खूनी संघर्ष का दोहराव

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(Rajneesh Saini/Priyanka)

हरिद्वार : महाकुंभ 2021 में एक बार फिर अखाड़ों के बीच संघर्ष की उत्पन्न परिस्थितियों को आईजी संजय गुंज्याल ने अपनी सूझबूझ से टाल दिया।

जिसके लिये सभी अब संजय गुंज्याल की प्रशंसा कर रहे हैं।

कब और कैसे उत्पन्न हुई ये परिस्थिति :—-

हरिद्वार महाकुम्भ के प्रथम शाही स्नान,महाशिवरात्रि पर सभी कार्यक्रम पूर्व निर्धारित समय और व्यवस्था से चल रहे थे।

जुना अखाड़ा का शाही स्नान का जुलूस मायादेवी प्रांगण स्थित छावनी से निकल हर की पैड़ी की ओर चल पड़ा परन्तु जुना अखाड़े के जुलूस का हिस्सा किन्नर अखाड़ा के महामंडलेश्वर और अन्य पदाधिकारीगण विलंब से छावनी से निकले।

हरिद्वार महाकुम्भ में प्रथम शाही स्नान पर अखाड़ों की पेशवाई पर पुष्प वर्षा करता उत्तराखंड सरकार का हेलीकॉप्टर

विलंब से निकलने के कारण किन्नर अखाड़े के पदाधिकारी अपने अनुयायियों सहित हर की पैड़ी पर स्नान हेतु उस समय पहुंचे जिस समय निरंजनी अखाड़ा अपने निर्धारित समय पर छावनी से निकल कर हर की पैड़ी की और बढ़ चुका था।

समय के इस अतिक्रमण के कारण दोनो अखाड़ों का मार्ग में एक दूसरे के आमने सामने आना तय था।

और IG संजय गुंज्याल ने दिया सूझबूझ का परिचय :—

नवनियुक्त मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के द्वारा शाही स्नान के दौरान सभी अखाड़ों के जुलूस के ऊपर हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा का आदेश दिया गया था।

संजय गुंज्याल ने हर की पैड़ी की ओर बढ़ रहे निरंजनी अखाड़े के पदाधिकारियों से आग्रह किया कि मुख्यमंत्री के आदेश के अनुसार आपके शाही स्नान के जुलूस पर पुष्पवर्षा किया जाना है

जिस हेतु तुलसी चौक का चयन किया गया है इसलिए आप अपने जुलूस की तुलसी चौक पर ले जाकर थोड़ी देर के लिए रोक दें

ताकि हेलीकॉप्टर आपके जुलूस पर पुष्पवर्षा करके उत्तराखंड सरकार की ओर से आपका स्वागत सम्मान कर सके।

आईजी कुम्भ के इस आग्रह को अखाड़े के पदाधिकारियों द्वारा सहर्ष स्वीकार कर लिया गया।

इसी दौरान आईजी कुम्भ के द्वारा किन्नर अखाड़े के साथ जुलूस ड्यूटी पर लगे पुलिसबल को निर्देशित किया गया कि जितना जल्दी हो सके किन्नर अखाड़े को वापस अपनी छावनी में पहुंचा दिया जाए।

और ऐसे किया टाइम मैनेजमेंट :—-

किन्नर अखाड़े को छावनी में पहुंचाने में समय लगना तय था और ज्यादा देर तक निरंजनी अखाड़े को तुलसी चौक पर रोके रखना भी टेढ़ी खीर था।

मौके की नजाकत को भांपते हुए आईजी कुम्भ के द्वारा हेलीकॉप्टर के पायलट से बात की गई और उसको बताया गया कि तुलसी चौक के ऊपर चक्कर लगाता रहे परन्तुं पुष्पवर्षा तभी करे जब उसे कहा जाए।

इस पर हेलीकॉप्टर के पायलट द्वारा तुलसी चौक पर आकर निरंजनी अखाड़े के जुलूस के ऊपर कभी नीचे, कभी ऊपर जाकर चक्कर लगाना शुरू कर दिया गया।

इधर पुलिस बल किन्नर अखाड़े को लेकर छावनी में प्रवेश कराने के नजदीक पहुंच गया।

तुलसी चौक पर निरंजनी अखाड़े के जुलूस के ऊपर चल रही हेलीकॉप्टर की कलाबाजियों के दौरान थोड़ी देर में ही मैसेज आया कि किन्नर अखाड़ा अपनी छावनी में सकुशल प्रवेश कर गया है।

इस संदेश के प्राप्त होने के साथ ही सबने राहत की सांस ली और आईजी कुम्भ के निर्देश पर हेलीकॉप्टर ने निरंजनी अखाड़े के जुलूस पर पुष्पवर्षा आरम्भ कर दी।

आकाश से बरसते गुलाब के फूलों की पंखुड़ियों से पूरा रास्ता गुलाबी रंग से रंग गया लेकिन कुम्भ पुलिस के अधिकारियों के दिल को सबसे बड़ा सुकून यही था कि शुक्र है कि ये रास्ता गुलाबी रंग से रंगा है न कि किसी और रंग से….

क्या है हरिद्वार कुम्भ 1998 का खूनी इतिहास

वर्ष 1998 में हरिद्वार कुम्भ अपने चरम पर था कुम्भ की शान शाही स्नान को देखने लाखो की संख्या में श्रद्धालु पहुँच रहे थे शाही स्नान का कार्यक्रम हमेशा की तरह तय किया गया था,

किन्तु होनी प्रबल होती है निरंजनी अखाड़े के हजारों नागाओं को स्नान में देरी हो गई।

स्नान के अगले क्रम में अपनी बारी का इंतजार कर रहे जूना, अग्नि और आह्वान अखाड़ों के तमाम नागा बिफर उठे। भारी पुलिस फोर्स द्वारा उन्हें रोकने की भरसक कोशिश की गई लेकिन नागाओं के क्रोध के आने वो भी नाकाम रहे।

जूना अखाड़े के घुड़सवार नागा अपने घोड़ों को पुल से दौड़ाते हुए हरकी पैड़ी आ गए। पीछे-पीछे इन तीनों अखाड़ों के हजारों बाबा भी पहुंच गए, फिर क्या था, हर की पैड़ी पर जबरदस्त संग्राम और मारकाट शुरू हो गई।

विलंब से क्रोधित तीनो अखाड़ों के नागा और बाबाओं ने निरंजनी अखाड़े से लौटते साधुओं पर रास्ते में भी हमला कर दिया।

रास्ते में पड़ने वाले जगद्गुरु शंकराचार्य माधवाश्रम के आश्रम में नागा और बाबा घुस गए। तोड़फोड़ और पथराव करते हुए शंकराचार्य सहित अन्य पदाधिकारियों के साथ अभद्रता की।

यह सब इतने पर ही नही रुका इसके बाद अखाड़े से गोलियां चलनी शुरू हो गई

और की बड़ी घटना को होने से रोकने के लिए पुलिस और पीएसी को भी हवाई फायर कर दोनों तरफ के नागा और साधुओं को खदेड़ना पड़ा।

इस खूनी संघर्ष में अनेक साधु और पुलिसकर्मी घायल हुए।

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