आसान हुआ कैंसर का इलाज,राज्य का पहला सरकारी “पेट स्कैन” सेंटर बना एम्स
Cancer Treatment Becomes Easier: AIIMS Becomes the State's First Government PET Scan Cent

देहरादून,17 अप्रैल 2026: घातक मानी जाने वाली बीमारी कैंसर अब लाइलाज नहीं है बशर्ते कि कैंसर अपने अंतिम चरण में न पहुँचा हो
उच्च तकनीकों का इस्तेमाल करने से इसका इलाज अब पहले की अपेक्षा आसान हो गया है
एम्स ऋषिकेश में कैंसर की जांच और इलाज की सभी आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं मौजूद हैं.
इनमें उच्च तकनीक आधारित पेट स्कैन जैसी जांच भी शामिल है
पेट स्कैन सुविधा वाला पहला सरकारी संस्थान
एम्स ऋषिकेश राज्य का पहला ऐसा सरकारी स्वास्थ्य संस्थान है,
जहाँ पेट स्कैन (PET Scan) Positron Emission Tomography की अत्याधुनिक सुविधा उपलब्ध है
अप्रैल 2025 में स्थापित इस मशीन से पिछले एक वर्ष में 1590 मरीजों को लाभ मिला है
न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग की हेड प्रो. मनीषी नारायण ने बताया कि प्रतिमाह लगभग 150 रोगी यह जांच करवा रहे हैं,
जिससे कैंसर कोशिकाओं के प्रसार और उपचार के सटीक प्रभाव को समझने में मदद मिल रही है.
क्या है (PET) स्कैन
पॉज़िट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी (PET) स्कैन एक उन्नत परमाणु चिकित्सा (nuclear medicine) इमेजिंग तकनीक है,
जिसका उपयोग शरीर के अंगों और ऊतकों की चयापचय (metabolic) गतिविधि को देखने के लिए किया जाता है।
यह मुख्य रूप से कैंसर के निदान, स्टेजिंग, और उपचार के मूल्यांकन के लिए किया जाता है
इसमें रोगी के शरीर में एक सुरक्षित रेडियोधर्मी पदार्थ (रेडियोट्रेसर) इंजेक्ट किया जाता है, जो शरीर के चयापचय को ट्रैक करता है
यह कैंसर, हृदय रोग और मस्तिष्क संबंधी विकारों (जैसे अल्जाइमर, मिर्गी) का पता लगाने के लिए सबसे सटीक परीक्षणों में से एक है।
कैंसर कोशिकाएं सामान्य कोशिकाओं की तुलना में अधिक ग्लूकोज का सेवन करती हैं,
जिसे PET स्कैन स्क्रीन पर चमकीले धब्बों के रूप में दिखाता है।
अक्सर PET स्कैन को CT स्कैन के साथ मिलाकर (PET-CT) किया जाता है,
जिससे शरीर की संरचना और कार्य दोनों की विस्तृत जानकारी मिलती है.
रोबोटिक सर्जरी और जेनेटिक प्रोफाइलिंग से सटीक उपचार
कैंसर के इलाज में रोबोटिक सर्जरी ने नई राह दिखाई है
इसमें सर्जन को 10 गुना बड़ा त्रिआयामी (3D) चित्र दिखता है,
जिससे इलाज की सटीकता बढ़ जाती है और गलती की संभावना नगण्य हो जाती है
हेमेटोलाॅजी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. उत्तम नाथ के अनुसार
“कैंसर का शुरुआती चरण में पता चलना ही आधी जंग जीतने जैसा है
चूंकि कोई भी दो कैंसर एक जैसे नहीं होते, इसलिए हम जेनेटिक प्रोफाइलिंग का उपयोग कर रहे हैं
इससे मरीज को प्रभावी उपचार मिलता है और दुष्प्रभावों (side effects) में कमी आती है।”
कैंसर रजिस्ट्री: डेटा से मजबूती
संस्थान में मरीजों का विस्तृत रिकॉर्ड रखने के लिए ‘कैंसर रजिस्ट्री’ की व्यवस्था की गई है
इसे ‘हॉस्पिटल बेस’ और ‘पापुलेशन बेस’ दोनों स्तरों पर तैयार किया जा रहा है,
ताकि भविष्य के शोध और बेहतर स्वास्थ्य नीतियों में मदद मिल सके
उत्तराखंड में कैंसर की स्थिति: एक चुनौती
एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. दीपक सुन्दरियाल ने बताया कि भारत में कैंसर एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है।
पुरुषों में फेफड़ों, मुंह (ओरल) और जठरांत्र (गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल) कैंसर के मामले अधिक हैं।
महिलाओं में स्तन कैंसर (Breast Cancer) सबसे प्रमुख है, जिसके बाद सर्वाइकल और ओवेरियन कैंसर के मामले सामने आ रहे हैं
विकिरण चिकित्सा (Radiation Therapy) और इम्यूनोथेरेपी की सुविधा उपलब्ध हैं
चिकित्सकों का कहना है कि यदि कैंसर को अंतिम चरण में पहुँचने से पहले पहचान लिया जाए, तो आधुनिक तकनीकों के माध्यम से मरीज को पूरी तरह स्वस्थ करना अब मुमकिन है
’कैंसर की रोकथाम के लिए समय पर पहचान और बेहतर इलाज बहुत जरूरी है।
एम्स ऋषिकेश कैंसर की रोकथाम, बीमारी की जांच, निदान और इलाज के लिए एकीकृत दृष्टिकोण अपनाते हुए इसके प्रभाव को कम करने के लिए दृढ़संकल्पित हैं।
इसके अलावा संस्थान, कैंसर जागरूकता बढ़ाने के लिए भी नियमित स्तर पर जागरूकता के कार्यक्रम चला रहा है।’’
प्रो. मीनू सिंह, कार्यकारी निदेशक, एम्स ऋषिकेश









