ईद के जश्न के बीच डोईवाला के युवाओं ने पेश की मिसाल; जौलीग्रांट अस्पताल पहुंच बचाई 3 जिंदगियां
Amidst Eid celebrations, the youth of Doiwala set an example; rushing to Jolly Grant Hospital, they saved three lives.

देहरादून,29 मई 2026 : जहां एक ओर पूरे देश में मुस्लिम समाज के लोग अकीदत के साथ ईद-उल-अजहा (बकरीद) का पावन त्योहार मना रहे थे, वहीं डोईवाला की अग्रणी सामाजिक संस्था ‘एक मदद ब्लड ग्रुप समिति’ के सेवादार मरीजों की सांसें बचाने के लिए मुस्तैद खड़े रहे।
संस्था के संस्थापक व अध्यक्ष अधिवक्ता साकिर हुसैन, मोहम्मद आसिफ और शहबाज अली ने मानवता और कौमी एकता की एक अनूठी मिसाल पेश की
उन्होंने त्योहार के दिन सीधे हिमालयन हॉस्पिटल जौलीग्रांट रुख किया।
इन तीनों रक्तवीरों ने अस्पतालों में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे तीन अलग-अलग गंभीर व अनजान मरीजों के लिए तत्काल रक्तदान कर उन्हें नया जीवनदान दिया, जिसकी अब चारों ओर जमकर सराहना हो रही है।
त्योहार के बीच अस्पताल पहुंचकर दिया जीवनदान
प्राप्त जानकारी के अनुसार, नैनीताल निवासी सुगरा, जो जौलीग्रांट अस्पताल में कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से जूझ रही थीं, उन्हें आपातकालीन स्थिति में रक्त की सख्त जरूरत थी।
मरीज के परिजन डोनर न मिलने के कारण बेहद परेशान थे, जिसके बाद उन्होंने समिति के अध्यक्ष साकिर हुसैन से संपर्क साधा।
सूचना मिलते ही साकिर हुसैन बिना एक पल गंवाए त्योहार के बीच से सीधे ब्लड बैंक पहुंचे और तुरंत रक्तदान किया।
इसी क्रम में राजस्थान निवासी मरीज नरेंद्र ममगाईं के लिए मोहम्मद आसिफ ने अस्पताल पहुंचकर अपनी जांच करवाई और उपयुक्त डोनर पाए जाने पर तत्काल रक्तदान कर उनके परिजनों की चिंता दूर की।
वहीं, तीसरे रक्तवीर शहबाज अली ने ऑपरेशन थिएटर (OT) में भर्ती मरीज महमूद के सफल ऑपरेशन के लिए समय पर रक्तदान कर अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाई।
तीनों युवाओं ने ब्लड बैंक में रहकर निस्वार्थ भाव से अनजान मरीजों के लिए अपना कीमती समय और सेवा समर्पित की।
युवाओं से अपील— ‘रक्तदान महादान’ मुहिम का हिस्सा बनें
इस पावन अवसर पर समिति के कोषाध्यक्ष अधिवक्ता शादाब हसन ने युवाओं से भावुक अपील करते हुए कहा कि रक्तदान से बढ़कर संसार में कोई दूसरा दान नहीं है।
उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे किसी भी प्रकार के भ्रम या डर को मन से निकालकर इस जीवनदायिनी मुहिम से अधिक से अधिक संख्या में जुड़ें।
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि युवाओं को घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है, बल्कि उन्हें आगे आकर इस मुहिम को बढ़ाना चाहिए ताकि समय पर रक्त न मिलने के कारण किसी भी बेगुनाह की जान न जाए।
संस्था के इन युवाओं का यह जज्बा न केवल समाज में गंगा-जमुनी तहजीब को मजबूत करता है, बल्कि नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का एक बड़ा स्रोत बन गया है।
इस अवसर पर उपस्थित अधिवक्ता साकिर हुसैन (संस्थापक/अध्यक्ष), मोहम्मद आसिफ, शहबाज अली एवं अधिवक्ता शादाब हसन (कोषाध्यक्ष) उपस्थित रहे ।







