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‘त्वचा’ ही नही ‘अंदरूनी अंगों’ को भी करती है प्रभावित,जानिये इस बिमारी के लक्षण और निदान

देहरादून के डोईवाला स्थित हिमालयन हॉस्पिटल जौलीग्रांट में सिस्टमिक स्क्लेरोसिस माह मनाया जा रहा है.
जिसमें अस्पताल आने वाले लोगों की इस बीमारी के प्रति जागरूक करने के साथ इसके लक्ष्ण व निदान की जानकारी दी जा रही है.
> ऑटो इम्यून होती है सिस्टेमेटिक स्क्लेरोसिस
> गैर-संक्रामक और गैर-कैंसर की है स्थित
> पुरुषो की अपेक्षा महिलायें प्रभावित
> इस बिमारी का प्रभावी ईलाज है उपलब्ध
>जीवन के लिए हो सकती है खतरा

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रजनीश प्रताप सिंह ‘तेज’

देहरादून : हिमालयन हॉस्पिटल जौलीग्रांट में क्लिनिकल इम्यूनोलॉजी एंड रूमेटोलॉजी विभाग की ओर से अस्पताल में जागरूकता अभियान चलाया गया.

जिसमें नर्सिंग कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने Scleroderma स्क्लेरोडर्मा बीमारी के लक्ष्णों व उपचार के बारे में पोस्टर प्रदर्शनी के माध्यम से लोगों को जानकारी दी साथ ही बीमारी से संबंधित पर्चें भी बांटे.

इस अवसर पर आयोजित हेल्थ टॉक में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुये डॉ. योगेश प्रीत सिंह ने कहा कि पूरे जून माह में स्क्लेरोडर्मा को लेकर जागरूकता अभियान चलाया जायेगा.

उन्होंने बताया कि सिस्टमिक स्क्लेरोसिस या स्क्लेरोडर्मा एक ऑटोइम्यून Autoimmune स्थिति है जिसका कारण ज्ञात नहीं है.

यह एक गैर-संक्रामक Non Infectious और गैर-कैंसर Non-Cancerous वाली स्थिति है.

Scleroderma स्क्लेरोडर्मा से प्रभावित होने वालों में अधिकांश 30 से 50 वर्ष की आयु के लोग होते है लेकिन यह बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक किसी को भी प्रभावित कर सकता है.

पुरुषों की अपेक्षा में महिलाएं इससे अधिक प्रभावित होती हैं. डॉ. योगेश प्रीत सिंह ने बताया कि इस बीमारी का प्रभावी उपचार उपलब्ध हैं जो Systematic Sclerosis सिस्टमिक स्क्लेरोसिस या Sleroderma स्क्लेरोडर्मा वाले व्यक्ति को सामान्य जीवन जीने में मदद करता है.

स्क्लेरोसिस बीमारी के लक्ष्ण

डॉ. योगेश प्रीत सिंह ने बताया कि इस बीमारी में चेहरे, छाती, पेट, हाथ, पैर और उंगलियों पर तंग या मोटी त्वचा, शुष्क त्वचा; त्वचा में खुजली होती है.

यह सिर्फ त्वचा को प्रभावित करने वाली बीमारी नहीं है. त्वचा के अलावा यह फेफड़े, हृदय, जठरांत्र प्रणाली और रक्त वाहिकाओं जैसे अन्य अंग प्रणालियों को भी प्रभावित कर सकती है.

इसके अलावा सांस लेने में कठिनाई, सूखी खांसी, ठंड लगने पर उंगलियों का रंग बदलना, उंगलियों के छाले, मुंह सूखना, निगलने में कठिनाई, दस्त, कब्ज, कमजोरी, जोड़ों का दर्द, जोड़ों में सूजन; तंग त्वचा के कारण मुंह खोलने में कठिनाई।

रोग की गंभीरता हल्के से लेकर गंभीर तक भिन्न हो सकती है और जीवन के लिए खतरा भी हो सकती.

 

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