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( हेल्थ ) सांस व दिल की धड़कन अचाकन रुकने पर जान बचा सकता है सीपीआर (CPR)

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देहरादून : लाइफ सपोर्ट को जन-जन तक पहुंचाने के लिए ग्रामीण विकास संस्थान में हिमालयन हॉस्पिटल के सहयोग से एक दिवसीय कॉर्डियो पल्मोनरी रेससिटेशन (सीपीआर) प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। जिसमें प्रतिभागियों को सीपीआर देने की सही तकनीक के बारे में जानकारी दी गयी।

मंगलवार को सीपीआर कार्यशाला को संबोधित करते हुये हिमालयन हॉस्पिटल के नियोनेटल विभागाध्यक्ष डॉ. गिरीश गुप्ता ने कहा कि

कॉर्डियो पल्मोनरी रेससिटेशन (सीपीआर) के इस्तेमाल से किसी शख्स की सांस व दिल की धड़कन अचाकन रुक जाने पर उसे बचाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि (सीपीआर) तकनीक का ज्ञान आमजन को भी होना चाहिए। जिससे जरूरत पड़ने पर किसी का जीवन बचाया जा सके।

उन्होंने कहा कि देश में हर साल लाखों लोगों की दिल की बिमारी की वजह से मौत हो जाती है। इनमें से पचास फीसदी लोगों की मौत वक्त पर अस्पताल न पहुंच पाने की वजह से होती है।

ऐसे में सीपीआर तकनीक किसी जीवनदायिनी से कम नहीं।

कहा कि अगर किसी शख्स को दिल का दौरा पड़ा है तो उसकी जीवन की रक्षा के लिए शुरुआती कुछ मिनट बेहद अहम होते है। ऐसे में सीपीआर तकनीक का इस्तेमाल कर प्रभावित व्यक्ति का जीवन बचाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक लोगों को इस जीवनदायी तकनीक का प्रशिक्षण लेना चाहिए। क्योंकि आपातकालीन स्थिति से सामना कहीं भी और कभी भी हो सकता है।

आरडीआई की निदेशक बी. मैथिली ने कहा कि उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्र जहां चिकित्सकों का अभाव है। वहां यह प्रशिक्षण अत्यंत उपयोगी साबित होगा।

कार्यशाला में आरडीआई स्टाफ सहित 72 प्रतिभागियों ने डॉ. गिरीश गुप्ता के निर्देशन में पुतलों पर सीपीआर का प्रशिक्षण लिया। कार्यशाला में प्रतिभागियों को जागरुक किया गया कि वह यहां लिये गये प्रशिक्षण से अन्य लोगों को भी प्रशिक्षित करेंगे।

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