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3 अंकों से टूटा था सपना,18 साल बाद हिम्स जॉलीग्रांट की दीपिका ने NEET क्रैक कर रचा इतिहास

A dream shattered by just 3 marks; 18 years later, Deepika from HIMS Jollygrant made history by cracking NEET.

देहरादून,29 अगस्त 2026 : कभी मेडिकल की पढ़ाई का सपना महज तीन अंकों के अंतर से अधूरा रह गया था।

फिर शादी हुई और बेटा हुआ।

इसके बाद जिंदगी की जिम्मेदारियां भी लगातार बढ़ती गईं।

लेकिन उन्होंने अपने सपने को कभी खत्म नहीं होने दिया।

करीब 18 साल के लंबे अंतराल के बाद उन्होंने एक बार फिर से किताबें उठाईं।

उन्होंने नए सिरे से नीट की तैयारी शुरू की।

अपने पहले ही प्रयास में उन्होंने नीट परीक्षा सफलतापूर्वक क्वालिफाई कर ली।

इसके बाद उत्तराखंड स्टेट कोटे से देहरादून मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की सीट हासिल कर ली।

यह बेहद प्रेरणादायी कहानी Dr Deepika Khanduja की है।

वह वर्तमान में Himalayan Institute of Medical Sciences (Hims) , जॉलीग्रांट के न्यूरोलॉजी विभाग में स्ट्रोक काउंसलर के रूप में कार्य कर रही हैं।

3 अंकों से टूटा था सपना, हिम्स जॉलीग्रांट में मिली नई दिशा

डॉ. दीपिका ने वर्ष 2008 से 2013 के बीच बीडीएस की पढ़ाई की थी।

उस समय उनका मेडिकल क्षेत्र में आगे बढ़ने और न्यूरोलॉजी के क्षेत्र में चिकित्सक बनने का सपना था।

लेकिन प्रवेश परीक्षा में वह महज तीन अंकों के मामूली अंतर से पीछे रह गईं

वर्ष 2016 में उनका विवाह संपन्न हुआ।

इसके बाद बेटे के जन्म के साथ ही परिवार की जिम्मेदारियां भी काफी बढ़ गईं।

आमतौर पर जिंदगी के ऐसे पड़ाव पर लोग अपने अधूरे सपनों को पीछे छोड़ देते हैं।

लेकिन डॉ. दीपिका ने कभी ऐसा नहीं किया।

उन्होंने अपने सपने को पूरा करने की दिशा में पहला कदम बढ़ाया।

उन्होंने आईसीएमआर प्रोजेक्ट के अंतर्गत स्ट्रोक काउंसलर के रूप में हिम्स जॉलीग्रांट के न्यूरोलॉजी विभाग से जुड़कर काम शुरू किया।

न्यूरोलॉजी विभाग में कार्य करते हुए वरिष्ठ न्यूरो चिकित्सक डॉ. दीपक गोयल ने उनकी क्षमता और सीखने की ललक को पहचाना।

डॉ. दीपिका बताती हैं कि डॉ. गोयल ने उन्हें दोबारा मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी करने और चिकित्सक बनने के लिए लगातार प्रेरित किया।

इस पूरे दौर में उनके अभिभावक, परिजनों व सहयोगियों ने भी उनका भरपूर हौसला बढ़ाया।

हालांकि, करीब 18 साल के लंबे अंतराल के बाद दोबारा नीट की तैयारी करना उनके लिए बिल्कुल आसान नहीं था।

उन्होंने इस संघर्षपूर्ण अनुभव को “एक पहाड़ खोदने जैसा” बताया।

पढ़ाई के साथ-साथ परिवार और अन्य घरेलू जिम्मेदारियों को संभालते हुए उन्होंने लगातार कड़ी मेहनत की।

आखिरकार उनकी यह लगन और मेहनत रंग लाई।

डॉ. दीपिका ने अपने पहले ही प्रयास में नीट परीक्षा क्वालिफाई कर ली।

उन्होंने बेहतरीन रैंक हासिल करते हुए उत्तराखंड स्टेट कोटे से एमबीबीएस की सीट प्राप्त कर ली।

सकारात्मक सोच, ध्यान और दृढ़ इच्छाशक्ति से पाई स्वर्णिम सफलता

डॉ. दीपिका की यह असाधारण उपलब्धि ऐसे समय में सामने आई है,

जब हाल ही में नीट परीक्षा के परिणाम और परीक्षा के दबाव से जुड़ी कई दुखद घटनाओं ने समाज और अभिभावकों को सोचने पर मजबूर किया है।

वह कहती हैं कि परीक्षा को लेकर तनाव होना पूरी तरह स्वाभाविक है।

लेकिन किसी असफलता को कभी भी जीवन की अंतिम असफलता नहीं मानना चाहिए।

कभी-कभी मंजिल तक पहुंचने में थोड़ा समय लगता है।

कई बार रास्ता बदलना पड़ता है और कई बार दोबारा नई शुरुआत करनी पड़ती है।

डॉ. दीपिका अपनी इस शानदार सफलता में आध्यात्मिक अनुशासन और सकारात्मक सोच की महत्वपूर्ण भूमिका मानती हैं।

परीक्षा से पहले वह नियमित रूप से ध्यान करती थीं।

उनका मानना है कि पढ़ाई के साथ-साथ अपने मन को शांत व संतुलित रखना भी बेहद जरूरी है।

वह अपनी सफलता का श्रेय एचआईएचटी के संस्थापक ब्रह्मलीन डॉ. स्वामी राम की शिक्षाओं और दीक्षाओं को भी देती हैं।

उनका मानना है कि कठिन परिस्थितियों में मानसिक संतुलन और लक्ष्य पर अटूट विश्वास ने ही उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ. विजय धस्माणा ने डॉ. दीपिका खांडूजा को इस उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए हार्दिक शुभकामनाएं दीं।

उन्होंने कहा कि डॉ. दीपिका की यह सफलता यह साबित करती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, निरंतर मेहनत और सही मार्गदर्शन से कठिन से कठिन लक्ष्य को भी हासिल किया जा सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि विद्यार्थियों को परीक्षाओं को जीवन का अंतिम पड़ाव नहीं मानना चाहिए।

किसी परीक्षा में मिलने वाली सफलता या असफलता व्यक्ति की पूरी क्षमता और उसके भविष्य को निर्धारित नहीं करती।

विद्यार्थियों को हमेशा अपने मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए सकारात्मक सोच के साथ जीवन में आगे बढ़ना चाहिए।

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