बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए मासूम को थी खून की सख्त जरूरत, ‘एक मदद’ के सदस्यों ने दिया जीवनदान
The innocent child was in urgent need of blood for a bone marrow transplant; members of 'Ek Madad' gave the gift of life.

देहरादून,४ जुलाई 2026 : “मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना…” और “नर सेवा ही नारायण सेवा है” जैसी पंक्तियों को धरातल पर सच कर दिखाया है डोईवाला की प्रसिद्ध सामाजिक संस्था ‘एक मदद ब्लड ग्रुप समिति’ के जांबाज सदस्यों ने।
समिति के सदस्यों ने त्वरित सूझबूझ, असीम सेवा भावना और सांप्रदायिक सौहार्द का परिचय देते हुए एक 7 वर्षीय मासूम कैंसर पीड़ित बच्चे के लिए समय पर रक्तदान कर उसकी जान बचाई।
बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए थी खून की सख्त जरूरत
मूल रूप से हल्द्वानी निवासी सात वर्षीय मासूम लव राज इस समय कैंसर जैसी बेहद गंभीर और जानलेवा बीमारी से जिंदगी की जंग लड़ रहा है।
वर्तमान में उसका इलाज स्वामी राम हिमालयन अस्पताल (जौलीग्रांट) में चल रहा है।
चिकित्सकों के अनुसार, लव राज का जल्द ही बोन मैरो ट्रांसप्लांट (Bone Marrow Transplant) होना है,
जिसके लिए उसे तत्काल रक्त (Blood) की अत्यंत आवश्यकता थी।
मासूम के लाचार परिजन अस्पताल के चक्कर काट रहे थे और उन्हें रक्त की व्यवस्था करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।
जब उम्मीद की सारी किरणें धुंधली पड़ती दिख रही थीं, तभी इस बात की सूचना ‘एक मदद ब्लड ग्रुप समिति’ तक पहुंची।
सूचना मिलते ही समिति के जांबाज सदस्य बिना एक पल गंवाए,
आधी रात की परवाह किए बिना सीधे अस्पताल के ब्लड बैंक पहुंचे।
इन चार युवाओं ने पेश की इंसानियत की अनूठी मिसाल
मासूम लव राज को नया जीवन देने और उसके परिवार के आंसू पोंछने के लिए समिति के चार कर्मठ सदस्यों ने आगे आकर रक्तदान किया:
नफीस अहमद
मोहम्मद नईम अंसारी
मोहम्मद अकरम
अधिवक्ता महताब आलम
“किसी की जिंदगी बचाना ही सबसे बड़ा धर्म है”
समिति के अध्यक्ष साकिर हुसैन ने इस मौके पर कहा, “लव राज अभी बहुत छोटा है और वह इस गंभीर बीमारी से बहादुरी से लड़ रहा है।
हमारी समिति उसके जल्द स्वस्थ होने की दुआ करती है।
जब बात किसी मासूम की जान बचाने की हो, तो जाति, धर्म और मजहब की दीवारें अपने आप ढह जाती हैं।
समिति भविष्य में भी लव राज की हर संभव मदद के लिए चौबीसों घंटे तैयार है।”
परिजनों की आंखों से छलके आंसू, कहा- ‘ये हमारे लिए देवदूत हैं’
खून की बोतलें चढ़ने के बाद जब मासूम लव राज की हालत स्थिर हुई,
तो उसके परिजनों ने ‘एक मदद ब्लड ग्रुप समिति’ और चारों रक्तदाताओं का तहे दिल से आभार व्यक्त किया।
भावुक होते हुए परिजनों ने कहा कि संकट की इस घड़ी में, जब कोई राह नहीं सूझ रही थी,
तब इन मुस्लिम युवाओं ने उनके बच्चे के लिए ‘देवदूत’ (Angels) बनकर उसकी जान बचाई है।
यह समाज में आपसी भाईचारे की सबसे खूबसूरत तस्वीर है।
एक और जरूरतमंद को मिला सहारा
समिति का सेवा भाव यहीं नहीं रुका।
इसी दौरान अस्पताल में भर्ती एक अन्य गंभीर मरीज शकुंतला देवी को भी रक्त की सख्त आवश्यकता थी।
सूचना मिलते ही समिति के दो अन्य जांबाज सदस्यों—परवेज अली और जेकब खान ने भी तुरंत रक्तदान कर शकुंतला देवी की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई।
‘एक मदद ब्लड ग्रुप समिति’ के इस निस्वार्थ और मानवीय कार्य की आज पूरे डोईवाला और सोशल मीडिया पर जमकर सराहना हो रही है।
इन युवाओं ने साबित कर दिया है कि इंसानियत का खून एक ही रंग का होता है, जो धमनियों में बहकर दूरियां मिटाता है और जिंदगी बचाता है।







