स्वामी राम साधक ग्राम और एसआरएचयू में गुरु पूर्णिमा उत्सव, देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालु
Guru Purnima celebrations at Swami Rama Sadhaka Grama and SRHU; devotees arrive from across the country and abroad.

देहरादून,29 जुलाई 2026 : गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर वीरभद्र स्थित साधना मंदिर आश्रम, स्वामी राम साधक ग्राम एवं स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय (एसआरएचयू), जौलीग्रांट में भव्य गुरु पूजन समारोह का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर हिमालयन इंस्टीट्यूट हॉस्पिटल ट्रस्ट (एचआईएचटी) के संस्थापक ब्रह्मलीन गुरुदेव डॉ. स्वामी राम को देश-विदेश से आए शिष्यों एवं श्रद्धालुओं ने नमन कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
वैदिक मंत्रोच्चार और आरती से भक्तिमय हुआ वातावरण
गुरु पूर्णिमा उत्सव के अंतिम दिन के कार्यक्रमों का शुभारंभ प्रातः 7:00 बजे गुरु वंदना से हुआ।
इसके पश्चात पंचांग पूजा, श्री गुरु पूजा, पूर्णाहुति तथा गुरु गीता पाठ की पूर्णता के बाद भव्य आरती संपन्न हुई।
पूर्वाह्न 9:30 बजे प्रसाद एवं आशीर्वाद वितरण के साथ समारोह का समापन हुआ। पूरा परिसर वैदिक मंत्रोच्चार, हवन और पूजा-अर्चना के सुरों से गुंजायमान रहा।
जनसेवा और साधना का मार्ग दिखा गए स्वामी राम: डॉ. विजय धस्माणा
समारोह के दौरान एसआरएचयू के अध्यक्ष डॉ. विजय धस्माणा, स्वामी राम साधक ग्राम के प्रमुख स्वामी ऋतवान भारती , डॉ. विजेंद्र चौहान तथा डॉ. प्रकाश केशवया ने गुरुदेव डॉ. स्वामी राम के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए अध्यक्ष डॉ. विजय धस्माणा ने कहा:
“गुरुदेव स्वामी राम ने अपना संपूर्ण जीवन मानवता, गुरु परंपरा और जनसेवा को समर्पित किया। उनके और शिष्यों के संबंधों की नींव ज्ञान, मौलिक चिंतन, नैतिक मूल्यों तथा निःस्वार्थ स्नेह पर आधारित थी।
स्वामी राम का जीवन सेवा, साधना और समर्पण का एक अद्वितीय उदाहरण है, जो आज भी लाखों लोगों का मार्गदर्शन कर रहा है।”
शिष्यों ने साझा किए आध्यात्मिक अनुभव
समारोह के अंतिम चरण में देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं ने गुरुदेव के साथ बिताए पलों और अपने आध्यात्मिक अनुभवों को साझा किया।
सभी उपस्थित जनों ने स्वामी राम द्वारा दिखाए गए सेवा, साधना और आत्मबोध के मार्ग पर निरंतर चलने का संकल्प लिया।
प्रमुख उपस्थिति:
इस पावन अवसर पर आश्रम प्रबंधक डॉ. राहुल बलूनी, आश्रम से जुड़े ट्रस्टी, विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी, कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में स्वामी राम के देश-विदेश से आए शिष्य एवं अनुयायी उपस्थित रहे।








