Uttarakhand

“राष्ट्र माता” घोषित प्रदेश के डोईवाला में दम तौड़ता “गौ वंश”

आप वीडियो देखिएगा देहरादून : उत्तराखंड देश का पहला एकमात्र राज्य है जिसने बीते साल गाय को “राष्ट्र माता” का दर्जा दिया है।इसके लिए बाकायदा विधान सभा में प्रस्ताव पारित किया गया था जिसका विपक्ष ने भी समर्थन किया है।

सूबे की अंतरिम राजधानी देहरादून के अंतर्गत डोईवाला में एक के बाद एक “गौ वंश” की दुर्दशा के मामले सामने आ रहे हैं।

डोईवाला में बिना किसी संसाधन के अपने निजी खर्च पर “गौ वंश” की देखभाल का जिम्मा विश्व हिन्दू परिषद्,राष्ट्रीय गौ रक्षा आंदोलन और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने उठा रखा है।

फिलहाल डोईवाला डिग्री कॉलेज के नजदीक बैल मंडी के सुनसान-उजाड़ इलाके के बड़े हॉल में दुर्घटना में चोटिल आवारा पशुओं को रखा जा रहा है।

“यूके तेज़” के कैमरे के सामने ही आज एक घायल बछड़े ने अपनी अंतिम सांसे ली।

नगर सुरक्षा प्रमुख,बजरंग दल अविनाश सिंह ने अपने साथियों की मदद से भानियावाला के दुर्गा चौक से एक बछड़े को रेस्क्यू किया था।एक अज्ञात वाहन की टक्कर से यह बुरी तरह जख्मी हो गया था। तमाम डॉक्टरी ईलाज के बावजूद आज बछड़े ने अपना दम तोड़ दिया।

इससे पहले भी एक बछड़ा घायल होने पर उपचार के दौरान बच नही पाया था।

आज कार्यकर्ताओं ने एक गड्ढा खोदकर शव को दबा दिया।

वरदान सेठ अपने साथियों के साथ उपचार के दौरान

राष्ट्रीय गौरक्षा आन्दोलन समिति के प्रखंड गोरक्षक वरदान सेठ बीते ढाई साल में 112 “गौ वंश” को रेस्क्यू कर चुके हैं।

जब भी लोग उन्हें फोन करके किसी “गौ वंश” के एक्सीडेंट में घायल होने की खबर करते हैं वे अपने साथियों की मदद से उनके उपचार को आगे बढ़कर काम करते हैं।

ऐसे में जब कभी किसी की उपचार से पहले या बाद में मृत्यु हो जाती है तो उसको बाकायदा गड्ढा खोदकर दबाने का काम भी किया जाता है।

बजरंग दल के अविनाश सिंह ने मुख्यमंत्री से “गौ वंश” के संरक्षण के लिए डोईवाला में बैल मंडी में स्थान सहित अन्य सुविधाएं जुटाने की मांग की है।

उनका कहना है कि बैल मंडी के चार भवन में से एक भवन “गौ वंश” के संरक्षण के लिए दिया जाना चाहिए।

उन्होंने आशंका व्यक्त की है कि यदि चर्चा के मुताबिक बैल मंडी में डोईवाला तहसील शिफ्ट की जाती है तो तब इन घायल “गौ वंश” का क्या होगा।

यूं तो सूबे में “उत्तराखंड गौ सेवा आयोग” कईं बरस पहले बन चुका है लेकिन वो भी धरातल पर पंगु ही साबित हो रहा है।

डोईवाला में इन घायल जानवरों के लिए पशु प्रेमियों को आगे आना ही होगा। सरकारी के साथ-साथ सामाजिक संस्थाओं को भी आगे बढ़कर पहल करनी होगी। तभी कोई हल निकल पायेगा।

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