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(वीडियो देखें)”कानफोड़ू चुनाव प्रचार” से अब “शांत कैंपेन” पर क्या बोली डोईवाला की पब्लिक

देहरादून : देश के पूर्व चुनाव आयुक्त टी.एन. शेषन के द्वारा जो सुधार लाये गये उसके दूरगामी परिणाम जनता के सामने हैं।

अब जब लोकसभा चुनाव में चंद दिन बाकी हैं डोईवाला के चौक बाजार सहित गली-मोहल्लों से पोस्टर बैनर,कानफोड़ू शोर करते प्रचार वाहन गायब हैं।

चुनावी बेला पर “यूके तेज़” के कैमरे ने प्रचार की इस घनघोर शांति पर डोईवाला की पब्लिक का रिएक्शन जाना।

रीता वर्मा बोली,”शुक्र है फिजूलखर्ची बची”——

डोईवाला के त्रिघराट निवासी रीता वर्मा ने कहा कि,”पहले जगह-जगह गलियों में चुनाव प्रचार के पोस्टर-बैनर लगाए जाते थे,लाउडस्पीकर से गाड़ियां अनाउंसमेंट करती थी लेकिन अब ऐसा नही है।पहले चुनाव प्रचार में जनता के पैसों की जो फिजूलखर्ची होती थी वो अब नही होती जो की अच्छी बात है।

आप वीडियो देखिएगा ——–

“थैंक यू इलेक्शन कमिशन” बोले राकेश तायल —

डोईवाला चौक बाजार स्थित तायल वस्त्र भंडार के स्वामी राकेश तायल ने कहा कि पहले के चुनाव में शोरगुल,पोस्टर-बैनर का जमकर इस्तेमाल होता था लेकिन 2019 का चुनाव प्रचार शांति के साथ हो रहा है।

जिसके लिए हम इलेक्शन कमीशन के आभारी हैं।

 “झंडे-बैनर से पट जाता था डोईवाला चौक” बोले सौरभ अग्रवाल —

डोईवाला चौक स्थित “सागर कम्युनिकेशन” के स्वामी सौरभ अग्रवाल ने प्रचार की पुरानी यादों को ताजा करते हुए बताया कि पहले चुनाव के कईं दिन पहले से ही डोईवाला चौक पोस्टर,झंडे,बैनर से पट जाता था।

बच्चे अलग-अलग पार्टी के बिल्ले इकठ्ठे करते थे,प्रचार वाहन के लाउडस्पीकर से मेले जैसा माहौल होता था।

अब लोकसभा के चुनाव एकदम शांत तरीके से हो रहे हैं,जिससे हम सभी खुश हैं।  

“अच्छा कदम उठाया चुनाव आयोग ने” बोले सचिन मेहता —-

मेहता इलेक्ट्रिकल के स्वामी सचिन मेहता ने कहा कि पहले ज़माने में बच्चे चुनाव प्रचार के बिल्ले,झंडे-बैनर लेकर घूमते थे,लेकिन जबसे चुनाव प्रचार में सुधार हुआ है सब कुछ बदल गया है।

लोकसभा चुनाव का प्रचार शांत तरीके से हो रहा है जो कि अच्छा है।

“झंडे-बिल्ले के लिए बच्चे भागते थे” बोले राजेश गुप्ता —-

डोईवाला चौक बाजार स्थित मोबाइल फोन विक्रेता राजेश गुप्ता बताते हैं कि पुराने ज़माने में बच्चों में चुनाव को लेकर बड़ा उत्साह होता था ,बच्चे प्रचार सामग्री झंडे-बिल्ले के लिए प्रचार-वाहन के पीछे भागते थे।

अब जागरूकता बढ़ गयी है चुनाव प्रचार के तरीके बदल गए हैं।

चुनाव आयोग की सख्ती से प्रचार पर अनावश्यक धन की बर्बादी पर रोक लगी है।

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