pinko казино
DehradunHealthUttarakhand

104 हेल्थ हेल्पलाइन: 01 करोड़ 38 लाख से अधिक कॉल्स के जरिए 13 जिलों में निगरानी

104 Health Helpline: Over 13.8 million calls handled across 13 districts

देहरादून,19 अगस्त 2026 : मेडिकल, पुलिस और अग्निशमन सेवाओं के लिए 108 नंबर से लगभग हर कोई परिचित है।

लेकिन उत्तराखंड में 104 Health Helpline ने पिछले एक दशक में एक अलग पहचान बनाई है।

यह अब स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी, शिकायत निवारण और लाभार्थियों की सक्रिय निगरानी का अहम माध्यम बन गई है।

खास बात यह है कि यह व्यवस्था केवल नागरिकों की कॉल का जवाब नहीं देती

बल्कि जरूरतमंद मरीजों तक खुद पहुंचकर उनके स्वास्थ्य और उपचार की स्थिति का फॉलोअप भी करती है

स्वास्थ्य निदेशालय, देहरादून में संचालित 104 कॉल सेंटर अब तक एक करोड़ 38 लाख से अधिक स्वास्थ्य संबंधी कॉल कर चुका है।

यह व्यवस्था राज्य के सभी 13 जिलों में कार्यरत है।

यह 27 स्वास्थ्य सेवाओं और कार्यक्रमों से जुड़े लाभार्थियों तक पहुंच बना रही है।

प्रोएक्टिव ट्रैकिंग सिस्टम है सबसे बड़ी खासियत

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, जवाबदेह और नागरिक केंद्रित बनाने पर जोर दे रही है।

इसी सोच के तहत 104 हेल्पलाइन को विकसित किया गया है।

इसे केवल सूचना देने वाले कॉल सेंटर के बजाय प्रोएक्टिव हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम के रूप में तैयार किया गया है।

इस व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत इसका प्रोएक्टिव ट्रैकिंग सिस्टम है।

राज्य के किसी भी जिले में स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल में मरीज के पंजीकरण के बाद संबंधित जानकारियाँ 104 कॉल सेंटर पहुँचाई जाती है।

इसके बाद स्वास्थ्य संबंधी चुनौती से जूझ रहे लाभार्थी से नियमित रूप से संपर्क किया जाता है। उसकी स्थिति की जानकारी ली जाती है।

गर्भवती महिलाओं और बच्चों पर विशेष फोकस

खासतौर पर गर्भवती महिलाओं के मामले में यह व्यवस्था और महत्वपूर्ण हो जाती है।

गर्भावस्था के तीसरे महीने से लेकर प्रसव तक टीकाकरण और जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं का फॉलोअप किया जाता है।

बच्चे के जन्म के बाद करीब डेढ़ वर्ष तक उसके स्वास्थ्य और टीकाकरण की स्थिति पर भी नजर रखी जाती है।

इससे यह सुनिश्चित होता है कि जरूरी टीके और स्वास्थ्य सेवाएं समय पर मिल सकें।

27 स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी निगरानी

104 कॉल सेंटर कई महत्वपूर्ण स्वास्थ्य कार्यक्रमों से जुड़े लाभार्थियों से संपर्क करता है।

इनमें आयुष्मान भारत योजना, आशा कार्यकर्ता, बाल स्वास्थ्य और चारधाम यात्रा शामिल हैं।

इसके अलावा काउंसलिंग, डेंगू, प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास और ई-संजीवनी सेवाएं भी शामिल हैं।

हीमोफीलिया, हेपेटाइटिस, उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था, एचआईवी और एचपीवी से जुड़े मरीजों की भी निगरानी की जाती है।

उच्च रक्तचाप एवं मधुमेह, मातृ स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य, टीबी और थैलेसीमिया जैसे कार्यक्रम भी इसके दायरे में आते हैं।

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम, राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम और एंटी रेबीज सेवाओं के तहत भी लाभार्थियों को जरूरी जानकारी दी जाती है।

स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए परामर्श भी दिया जाता है।

सिर्फ जानकारी नहीं, योजनाओं की डिलीवरी की भी पड़ताल

104 की भूमिका यहीं खत्म नहीं होती।

कॉल सेंटर के माध्यम से मरीजों से सीधे फीडबैक लिया जाता है।

केंद्र और राज्य सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं के तहत मिलने वाले वित्तीय लाभ की जानकारी भी लाभार्थियों से क्रॉस-चेक की जाती है।

प्रोत्साहन की जानकारी भी इसी तरह सत्यापित की जाती है।

इससे यह पता लगाया जा सकता है कि योजनाओं का लाभ वास्तव में पात्र व्यक्ति तक पहुंचा या नहीं।

सीएम धामी बोले- स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाना प्राथमिकता

एक दशक के सफर में 104 हेल्थ हेल्पलाइन ने यह साबित किया है।

एक टोल-फ्री नंबर सिर्फ फोन उठाने की व्यवस्था नहीं होता।

बल्कि यह स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच, निगरानी, फॉलोअप और जवाबदेही का प्रभावी तंत्र भी बन सकता है।

पहाड़ी और भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण उत्तराखंड में यह मॉडल महत्वपूर्ण साबित हो रहा है।

दूरदराज के लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की दिशा में यह एक अहम कदम माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ बनाना सरकार की प्राथमिकता है।

उन्होंने कहा कि 104 हेल्थ हेल्पलाइन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

यह केवल नागरिकों की समस्याओं का समाधान नहीं कर रही।

बल्कि लाभार्थियों तक स्वयं पहुंचकर उनकी स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतर निगरानी और फॉलोअप सुनिश्चित कर रही है।

Related Articles

Back to top button
пинап