देहरादून में लोकतंत्र का ‘महामंथन’,24 जुलाई को देहरादून में जुटेंगे 7 देशों के प्रतिनिधि और 20+ यूनिवर्सिटीज
A 'grand deliberation' on democracy in Dehradun: Representatives from 7 countries and over 20 universities to gather in the city on July 24.
देहरादून,22 जुलाई 2026 : भारत में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को और अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और सशक्त बनाने के लिए राजधानी Dehradun एक ऐतिहासिक मंथन का गवाह बनने जा रही है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय, उत्तराखण्ड द्वारा आगामी 24 जुलाई को देहरादून के Graphic Era Hill University में एक दिवसीय International Conference का आयोजन किया जा रहा है।
इस भव्य सम्मेलन का मुख्य विषय “मॉडल स्टैंडर्ड्स फॉर इलेक्टोरल ऑब्जर्वर” (Model Standards for Electoral Observers) रखा गया है।
मुख्य अतिथि और दिग्गजों का लगेगा तांता
सम्मेलन में चुनाव प्रबंधन और प्रशासनिक व्यवस्था के बड़े-बड़े चेहरे शिरकत करेंगे
मुख्य अतिथि: डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम (मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तराखण्ड)
विशिष्ट उपस्थिति: ज्ञानेश कुमार भारती (वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त, भारत निर्वाचन आयोग), अनंत शंकर ताकवले (आईजी, स्टेट पुलिस ट्रेनिंग नोडल) एवं डॉ. विजय कुमार जोगदंडे (अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी)।
इसके अलावा देहरादून व हरिद्वार के जिलाधिकारी, आईआईएम (IIM) काशीपुर, उत्तरांचल यूनिवर्सिटी, दून यूनिवर्सिटी और ग्राफिक एरा के प्रमुख शिक्षाविद भी विभिन्न सत्रों में अपनी प्रस्तुतियां देंगे।
सात समंदर पार से जुड़ेंगे प्रतिनिधि (हाइब्रिड मोड)
अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे ने जानकारी दी कि इस कॉन्फ्रेंस को लेकर दुनिया भर में भारी उत्साह है।
अंतरराष्ट्रीय भागीदारी:
संयुक्त राज्य अमेरिका, रोमानिया, आयरलैंड, इंडोनेशिया, उज्बेकिस्तान, हंगरी और नेपाल की चुनाव प्रबंधन इकाइयों (Election Management Bodies) के प्रतिनिधियों ने इसके लिए रजिस्ट्रेशन कराया है।
400 से अधिक प्रतिभागी: देश-विदेश की 20 से अधिक यूनिवर्सिटीज के प्रोफेसर, रिसर्च स्कॉलर्स और छात्र-छात्राएं इस कॉन्फ्रेंस में ऑन-साइट व ऑनलाइन (हाइब्रिड मोड) के जरिए जुड़ेंगे।
क्या है इस ‘महामंथन’ का मुख्य उद्देश्य ?
चुनावी प्रेक्षकों की कार्यप्रणाली की समीक्षा:
इलेक्शन ऑब्जर्वर्स की भूमिका को और अधिक प्रभावी, व्यावहारिक और पारदर्शी बनाना।
अंतरराष्ट्रीय मानकों को समझना:
वैश्विक स्तर पर अपनाए जाने वाले मॉडल स्टैंडर्ड्स के आधार पर भारतीय चुनाव प्रणाली को नई मजबूती देना।
विचारों का आदान-प्रदान:
शिक्षाविदों, लॉ एक्सपर्ट्स, आईटी-मीडिया दिग्गजों और पॉलिसी मेकर्स को एक ही प्लेटफॉर्म पर लाकर बेहतर चुनावी रणनीतियों का ताना-बाना बुनना।






