
देहरादून,5 मार्च 2026 : स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय में चार दिवसीय ‘मॉडर्न बायोलॉजी’ का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया
इस दौरान प्रशिक्षुओं को हैंड्स ऑन प्रशिक्षण भी दिया गया
ट्रेनिंग प्रोग्राम में आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) और इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स (Internet of Things) पर विशेष जोर रहा
4 दिवसीय ट्रेनिंग प्रोग्राम
स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय (Swami Rama Himalayan University) जौलीग्रांट के School of Bio-sciences ‘स्कूल ऑफ बायोसाइंसेज’ द्वारा एक चार सप्ताह का गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया
इसका विषय “मॉडर्न बायोलॉजी: एडवांस्ड मॉलिक्यूलर टूल्स फॉर हेल्थकेयर” रहा
नई सोच और नैतिकता पर जोर
समापन समारोह की मुख्य अतिथि, अंतरराष्ट्रीय पीडीपी ट्रेनर मंजू नौटियाल ने विद्यार्थियों को संबोधित किया
उन्होंने कहा कि सफलता के लिए अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहना और नई सोच के साथ आगे बढ़ना अनिवार्य है।
उन्होंने भविष्य के वैज्ञानिकों को अपने कार्य में ईमानदारी और नैतिकता (Ethics) बनाए रखने की प्रेरणा दी।
AI और IoT की दी गई जानकारी
प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य क्षेत्र में उभरती तकनीकों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) के बढ़ते महत्व और उपयोग पर विशेष जानकारी साझा की।
इससे प्रतिभागियों को चिकित्सा और अनुसंधान के क्षेत्र में हो रहे आधुनिक तकनीकी बदलावों को समझने का मौका मिला।
प्रशिक्षण की मुख्य विशेषताएं:
प्रशिक्षण कार्यक्रम स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (DHR), स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रायोजित रहा
छह अलग-अलग संस्थानों के 30 चयनित प्रतिभागियों ने इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
स्कूल ऑफ बायोसाइंसेज के डीन डॉ. संजय गुप्ता ने बताया कि प्रतिभागियों को आधुनिक मॉलिक्यूलर तकनीकों, बायोइन्फॉर्मेटिक्स टूल्स और लैब वर्क का व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
प्रायोगिक प्रशिक्षण (Hands-on Training) प्रतिभागियों के लिए विशेष रूप से लाभदायक रहा
वैज्ञानिक लेखन (Scientific Writing), शोध नैतिकता और डेटा विश्लेषण जैसे विषयों पर भी विशेष सत्र आयोजित किए गए।
प्रमाण पत्र वितरण
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए।
प्रशिक्षणार्थियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि इस चार सप्ताह के कोर्स से उन्हें प्रयोगशाला कार्य और नई तकनीकों की गहरी समझ हासिल हुई है।
इस अवसर पर डीन डॉ. संजय गुप्ता के साथ डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय, डॉ. विवेक कुमार, डॉ. निक्कू यादव, डॉ. गीता भंडारी, डॉ. विकास जादौन और डॉ. नूपुर जोशी सहित विश्वविद्यालय के कई प्राध्यापक उपस्थित रहे।








