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डोईवाला सुगर मिल में 2 क्वाॅड बाॅडी की गयी स्थापित,होंगें कईं फायदे

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रजनीश प्रताप सिंह तेज

देहरादून :

आइये जानते हैं क्या होती है क्वाड बॉडी

डोईवाला सुगर मिल में दो क्वाड बॉडी स्थापित की गयी हैं.

19 वीं शताब्दी के प्रारंभ में चीनी उद्योग में खुले में गन्ने के रस के घोल को पकाया जाता था जिसमें वाष्प का अत्याधिक मात्रा में उपयोग होता था

जिस कारण की वजह से अधिक मात्रा में ईंधन के रूप में लकड़ी का उपयोग होता था

ईसी हॉवर्ड नाम के अंग्रेज ने 1812-13 में खुले में गन्ने के रस को पकाने के स्थान पर वैक्यूम पैन का आविष्कार किया जिसका उन्होंने पेटेंट भी करवाया यह अपने आप में एक क्रांतिकारी कदम साबित हुआ

इसी के परिष्कृत रूप में हॉरिजॉन्टल की बजाय वर्टीकल ट्यूब को Quadruple अथवा क्वाड बॉडी के रूप में उपयोग में लाया जाता है जिसके तमाम फायदे हैं

डोईवाला चीनी मिल में लगी क्वाड बॉडी

आशुतोष अग्निहोत्री, नोड़ल अधिकारी व निर्माण रसायनज्ञ ने बताया कि सुगर मिल डोईवाला में लगभग दो वर्ष पूर्व चीनी मिल गदरपुर से 2 क्वाॅड बाॅडी लायी गई थी जो कि काफी समय से मिल में स्थापित न होने पर असमंजस की स्थिति बनी हुई थी।

डोईवाला सुगर मिल के अधिशासी निदेशक डी0पी0सिंह, द्वारा मिल में ज्वाइनिंग करते ही पहले दिन मिल में किये गये निरीक्षण के दौरान उक्त क्वाॅड बाॅडी के सम्बन्ध में जानकारी ली गई

अक्टूबर, 2022 में मिल अधिकारियों की मीटिंग कर उक्त क्वाड बाॅडियों को पेराई सत्र 2022-23 की समाप्ति से पूर्व मिल में स्थापित करने का संकल्प लिया गया।

अधिशासी निदेशक दिनेश प्रताप सिंह द्वारा अपनी कार्यशैली एवं प्रशासकीय क्षमता का भरपूर उपयोग करते हुए मिल में उक्त क्वाड बाॅडियों को मात्र 5 माह की अल्पअवधि में स्थापित करवाया गया

जिसको आज अधिशासी निदेशक दिनेश प्रताप सिंह एवं उनकी पत्नी अलका सिंह, वरिष्ठ अधिवक्ता, उच्च न्यायालय एवं समाजसेवी द्वारा पूर्ण विधि-विधान के साथ पूजा अर्चना कर सफलतापूर्वक संचालित करवाया गया

जिसके बाद सुगर मिल डोईवाला में दिनेश प्रताप सिंह, अधिशासी निदेशक के नाम एक और उपलब्धि दर्ज हुई।

ये होंगें फायदे

अधिशासी निदेशक दिनेश प्रताप सिंह द्वारा समस्त अधिकारियों, कर्मचारियों एवं सम्मानित कृषकों को बधाई देते हुए बताया कि गदरपुर चीनी मिल से लायी गयी 2 क्वाड बाॅडियों में एक बाॅडी 560 हीटिंग स्क्वायर मीटर एवं दूसरी बाॅडी 440 हीटिंग स्क्वायर मीटर क्षमता की है

जिसको उपयोग में लाने पर प्लान्ट यूटिलाइजेशन क्षमता निश्चित रूप से बढेगी, इसके प्रयोग में आने के बाद पेराई सत्र के दौरान होने वाली सामान्य सफाई में आने वाले व्यय को भी कम किया जा सकेगा, बैगास की बचत में वृद्धि होगी तथा मिल में चीनी परता भी बढेगा जिससे मिल को वित्तीय लाभ भी होगा।

अधिशासी निदेशक ने बताया कि उक्त उपलब्धि मिल के अधिकारियों, कर्मचारियों एवं मैसर्स शहजाद इन्जी0 वक्र्स, गाजियाबाद द्वारा टीमभावना के साथ किये गये कार्यों के कारण सम्भव हो पायी।

ये रहे प्रमुख रूप से उपस्थित

इस अवसर पर दिनेश प्रताप सिंह अधिशासी निदेशक,अलका सिंह वरिष्ठ अधिवक्ता एवं समाजसेवी, अभिषेक कुमार, मुख्य अभियन्ता, ए0के0पाल उप मुख्य रसायनज्ञ, आशुतोष अग्निहोत्री, नोडल अधिकारी, सिद्धार्थ दीक्षित, गन्ना अधीक्षक, उदयकान्त मिश्रा, असित कुमार प्रतिहार, मांगे सिंह, अक्षय कुमार सिंह, सुशील कुमार, दीप प्रकाश, अभिषेक त्रिपाठी, मोहित सेमवाल, अमरजीत सिंह, अरविन्द शर्मा, नरेन्द्र कुमार, दीपक विश्वकर्मा, मयंक, महेन्द्र, अकरम खान, प्रकाश, जसवन्त, अशोक शर्मा, राममिलन, नरेन्द्र धीमान, शिवानी वर्मा, सुषमा आर्य, नीना संधू, प्रकाश कौर, रेखा देवी, निर्मला देवी आदि उपस्थित थे।

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