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डोईवाला में आम भक्तों के बीच जमीन पर बैठकर कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने सुनी भागवत कथा

In Doiwal, Cabinet Minister Subodh Uniyal sat on the ground among ordinary devotees and listened to the Bhagwat Katha.

 

देहरादून,31 जनवरी 2026 : देवभूमि उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल का एक बेहद सरल और सादगी भरा रूप डोईवाला में देखने को मिला।

शुक्रवार को डोईवाला के प्रसिद्ध अग्रवाल परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में पहुंचे कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने वीआईपी प्रोटोकॉल को दरकिनार कर आम श्रद्धालुओं के बीच जमीन पर बैठकर कथा श्रवण किया

वीआईपी सोफा छोड़ जमीन पर विराजे मंत्री

हरिद्वार मार्ग स्थित श्री बालाजी फार्म में चल रहे इस भव्य आयोजन में जैसे ही कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल पहुंचे, उन्होंने सबसे पहले व्यास पीठ को नमन किया।

आयोजकों ने उनके बैठने के लिए सोफे का प्रबंध किया था और उनसे वहां बैठने का विशेष आग्रह भी किया,

लेकिन मंत्री उनियाल ने अपनी सादगी की मिसाल पेश करते हुए श्रद्धालुओं के बीच जमीन पर बैठना ही उचित समझा।

वे आरती और कथा विराम के बाद प्रसाद वितरण तक वहीं मौजूद रहे।

कथा व्यास ने दिया पर्यावरण और आध्यात्म का संदेश

वृंदावन से पधारे प्रसिद्ध कथा व्यास पंडित धर्मेंद्र उपाध्याय शास्त्री जी ने अपनी सुमधुर वाणी से भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं और गिरिराज पूजन का प्रसंग सुनाया।

उन्होंने कथा के माध्यम से समाज को कई महत्वपूर्ण संदेश दिए:

पर्यावरण संरक्षण का संदेश

कथा व्यास पंडित धर्मेंद्र उपाध्याय शास्त्री जी ने आह्वान किया कि भारत की नदियां पूजनीय हैं।

हमें गंगा-यमुना ही नही बल्कि किसी भी नदी में पूजा के फूल या अन्य सामग्री नहीं फेंकनी चाहिए।

उन्होंने सुझाव दिया कि फूलों को मिट्टी में गड्ढा खोदकर दबा देना चाहिए ताकि वे खाद बन सकें और नदियां निर्मल रहें।

गोपी भाव का सही अर्थ:

कथा व्यास ने समझाया कि ‘गोपी’ कोई स्त्री वाचक शब्द नहीं बल्कि एक ‘भाव’ है।

जो अपनी समस्त इंद्रियों से कृष्ण की सेवा करे, वही गोपी है।

वस्त्र हरण का आध्यात्मिक अर्थ:

उन्होंने बताया कि भगवान ने गोपियों के वस्त्र नहीं बल्कि उनके अज्ञान को चुराया था।

यह क्रिया उन्हें यह ज्ञान देने के लिए थी कि जल में देवता, पितर और वरुण देव उपस्थित होते हैं, इसलिए नग्न स्नान न केवल सामाजिक मर्यादा के विरुद्ध है, बल्कि देवताओं का अपमान भी है।

इसका उद्देश्य ज्ञान देना था कि पवित्र नदियों में निर्वस्त्र स्नान नहीं करना चाहिए।

कालिया मर्दन और हृदय:

उन्होंने हृदय की तुलना यमुना से करते हुए कहा कि इसमें रहने वाला ‘कामनाओं का कालिया नाग’ ही जहर उगल रहा है।

जब हम दूसरों की बुराई करना छोड़ देंगे, तभी यह हृदय रूपी यमुना पवित्र होगी।

पितरों के निमित्त भक्ति का प्रवाह

विदित हो कि डोईवाला का प्रतिष्ठित अग्रवाल परिवार अपने पितरों की स्मृति में इस भागवत ज्ञान यज्ञ का आयोजन कर रहा है, जो 26 जनवरी से निरंतर जारी है।

आयोजन में डोईवाला और आसपास के क्षेत्रों से भारी संख्या में श्रद्धालु उमड़ रहे हैं।

मुख्य रूप से ये रहे उपस्थित

कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल,कथा आयोजक निशा अग्रवाल,ईश्वर चंद अग्रवाल,प्रेमचंद अग्रवाल,अभिषेक अग्रवाल,राहुल अग्रवाल के अलावा पंडित रमेश डंडरियाल,रामनिवास अग्रवाल,कैलाश मित्तल,गगन नारंग,बॉबी नारंग,सम्पूर्णानन्द थपलियाल,नीरज सिंघल,बॉबी शर्मा,हरकेश,मोहित गोयल मुख्य रूप से उपस्थित रहे

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