उत्तराखंड निवेश बोर्ड विवाद पर सरकार ने खोली भ्रामक प्रचार की पोल
Government exposes misleading propaganda regarding the Uttarakhand Investment Board controversy
देहरादून,11 नवंबर 2026 : उत्तराखंड निवेश एवं अवसंरचना विकास बोर्ड को लेकर फैलाई जा रही भ्रामक जानकारियों पर राज्य सरकार ने अपनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है।
सरकार के अनुसार राज्य में एसेट मॉनेटाइजेशन Asset Monetization और PPP model पीपीपी मॉडल के जरिए आर्थिक गतिविधियों को गति देने के लिए योजनाबद्ध प्रयास किए जा रहे हैं।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य राज्य के राजस्व में वृद्धि करना और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करना है।
भ्रामक प्रचार और जमीनों का वास्तविक सच
प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम ने बोर्ड से संबंधित विषयों पर मीडिया के सामने वास्तविक स्थिति प्रस्तुत की।
उन्होंने कहा कि बोर्ड के प्रयासों को लेकर पूर्व में भी तथ्यों के साथ पूरी जानकारी दी जा चुकी है।
इसके बावजूद बार-बार इस विषय को उठाकर जनता के बीच कई तरह की गलत धारणाएं बनाई जा रही हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी नई आर्थिक गतिविधि को धरातल पर उतारने के लिए भूमि एक अत्यंत महत्वपूर्ण संसाधन होती है।
उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए चुनिंदा सरकारी भूमि का उपयोग किया जा रहा है।
यह प्रक्रिया सरकारी संपत्तियों को मनमाने ढंग से किसी को हस्तांतरित करने के लिए बिल्कुल नहीं है।
वर्तमान में निवेश के लिए चिह्नित किए गए लैंड पार्सल की संख्या बहुत सीमित है।
आगामी दो से तीन माह के भीतर लगभग 6-7 चयनित लैंड पार्सल की बिडिंग प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
विभिन्न स्थानों की जमीनों को लेकर किया जा रहा प्रचार पूरी तरह से निराधार और काल्पनिक है।
चौबटिया की भूमि का परीक्षण करने के बाद उपयुक्त संभावनाएं न मिलने पर उसे प्रस्ताव से हटा दिया गया था।
धनोल्टी की भूमि के जांच में वन भूमि निकलने के कारण उसे भी योजना से ड्रॉप कर दिया गया था।
इसके बावजूद इन दोनों स्थानों का नाम लेकर जनता को अनावश्यक रूप से भ्रमित किया जा रहा है।
एचएमटी की भूमि वर्तमान में सिडकुल के पास है
और वह अपनी योजनाओं पर काम कर रहा है।
ऋषिकेश स्थित आईडीपीएल की भूमि वन भूमि है
और अभी तक राज्य सरकार को हस्तांतरित नहीं हुई है।
पीडब्ल्यूडी के रेस्ट हाउसों के संबंध में न तो कैबिनेट की मंजूरी मिली है
और न ही बोर्ड ने अनुमोदन दिया है।
रोजगार सृजन और विशाल आर्थिक लाभ
उत्तराखंड में विशेष रूप से हॉस्पिटैलिटी और पर्यटन क्षेत्र में निवेश की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।
धार्मिक, प्राकृतिक, एडवेंचर और वेलनेस टूरिज्म के विस्तार से स्थानीय अर्थव्यवस्था को नया जीवन मिलेगा।
प्रस्तावित हॉस्पिटैलिटी निवेश से लगभग 7,000 से 8,000 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की उम्मीद है।
इसके साथ ही सहायक गतिविधियों से 10,000 से 15,000 लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार प्राप्त होगा।
इन आर्थिक गतिविधियों से राज्य को प्रतिमाह लगभग 300 करोड़ रुपये के राजस्व की प्राप्ति होगी।
जीएसटी और अन्य करों से मिलने वाले इस राजस्व का उपयोग राज्य के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में किया जाएगा।
प्रदेश के अनेक युवा होटल प्रबंधन का प्रशिक्षण लेने के बाद रोजगार के लिए बाहर जाने को मजबूर होते हैं।
अपने ही राज्य में बड़े अवसर मिलने से युवाओं को पलायन नहीं करना पड़ेगा।
पर्यटन के विस्तार से स्थानीय किसानों, टैक्सी चालकों, हस्तशिल्पियों और दुकानदारों की आय में भी भारी बढ़ोतरी होगी।
तथ्यों पर आधारित चर्चा की अपील
सरकार का मूल उद्देश्य उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग करके उत्तराखंड को वित्तीय रूप से सशक्त बनाना है।
सरकारी भूमि का पारदर्शी उपयोग यदि राज्य के दीर्घकालिक आर्थिक हितों में हो रहा है तो वह सराहनीय कदम है।
प्रमुख सचिव सुंदरम ने जनता और मीडिया से तथ्यों के आधार पर ही चर्चा करने की अपील की है।
अपुष्ट जानकारियों और काल्पनिक दावों के आधार पर भ्रम फैलाना राज्य के विकास हित में नहीं है।
राज्य के संसाधनों का उपयोग युवाओं के उज्ज्वल भविष्य और समग्र विकास के लिए करना ही इस पूरी नीति का मूल ध्येय है।







