करोड़ो की स्टाम्प चोरी संभावित,डीएम ने किया ऋषिकेश सब-रजिस्ट्रार ऑफिस का औचक निरीक्षण
Stamp duty evasion worth crores of rupees exposed; District Magistrate conducts surprise inspection of Rishikesh Sub-Registrar office.

देहरादून,28 जनवरी 2026 : देहरादून के जिलाधिकारी सविन बंसल ने आज सब रजिस्ट्रार कार्यालय ऋषिकेश का औचक निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने ऑफिस में अव्यवस्थाओं और गंभीर अनियमितताओं पर गहरी नाराजगी जतायी ।
इस दौरान जिलाधिकारी ने मौके पर रजिस्ट्री कर रहे लिपिक से जवाब तलब किया
जिलाधिकारी ने पूछा कि आपके सम्पति मूल्य आंकलन 47-ए का कोई ज्ञान नही तो स्टाम्प शुल्क कैसे किया तय ?
किसने तुम्हे निबंधक के बदले अधिकार दिए ?
जिलाधिकारी ने इस मामले में क्रिमिनल एक्शन लेन की बात कही है
डीएम ने कहा कि सब रजिस्ट्रार कार्यालय ऋषिकेश में गंभीर अनियमितताएं पायी गयी हैं जिस पर कड़ा एक्शन तय है।
सब रजिस्ट्रार के बगैर ही अवैधानिक रूप से लिपिक द्वारा विलेखों का निबंधन किया जाना पाया गया।
औद्योगिक क्षेत्रों में आवासीय दरों पर भूखंड के छोटे टुकड़े कर कई रजिस्ट्रीय बरामद हुई
जिससे करोड़ो की स्टाम्प चोरी भी संभावना है
जिस पर विस्तृत आख्या शीघ्र मांगी गई।
कई महीनों से लम्बित मूल अभिलेख आवेदकों को वापिस नहीं किया गया, मूल विलेख पत्र अलमारी में धूल खा रहे थे।
वापिस करने की अधिकतम तीन दिन है सीमा,
परंतु सैकड़ों मूल विलेख अमलमारी में धूल खाते मिले।
लम्बित मूल अभिलेख; कूटरचित विलेख पर डीएम ने कम्प्यूटर जब्त करवया तहसील प्रशासन के सुपुर्द किया।
मूल अभिलेख लौटाने रजिस्ट्री की नकल देने को हजारो आमजन परेशान हो रहे थे।
रजिस्ट्री नकल अनुमन्य 24 घंटे के भीतर मिलनी चाहिए
जबकि मौके पर ऐसी नकल महीनों और सालों से लम्बित मिली।
निरीक्षण दौरान कार्यालय में मिला घोस्ट कार्मिक, जिसका न कोई नियुक्ति पत्र न उपस्थिति पंजिका में नाम था
इस जिपर जिलाधिकारी ने कार्मिकों का रिकार्ड तलब कर दिया है।
वहीं उपस्थित फरियादियों ने अपनी आपबीती प्रशासन को सुनाई जिस पर उप जिलाधिकारी ऋषिकेश को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
जिलाधिकारी नेे निरीक्षण में पाया कि कार्यालय में 6 माह से अधिक अवधि के विलेख पत्र लंबित थे।
औद्योगिक क्षेत्र से संबंधित खसरा नंबर एवं सूची की जानकारी पूछे जाने पर उपस्थित कार्मिक कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके।
विलेखों की प्रतिलिपि समय पर संबंधित क्रेताओं को उपलब्ध न कराए जाने तथा इस संबंध में मुख्यालय को सूचना प्रेषित किए जाने का कोई रिकॉर्ड भी प्रस्तुत नहीं किया जा सका।
उप निबंधक कार्यालय में घोस्ट कार्मिक पाए जाने पर जिलाधिकारी ने समस्त कार्मिकों का विवरण तत्काल तलब किया।
कार्यालय में पुराना डेटाबेस संचालित पाया गया, जिस पर संबंधित कार्मिक कोई ठोस व तार्किक कारण नहीं बता सके।
निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि सब रजिस्ट्रार की अनुपस्थिति में रजिस्ट्री की जा रही थी।
बताया गया कि सब रजिस्ट्रार देहरादून मीटिंग में हैं,
जबकि रजिस्ट्री केवल निबंधन लिपिक की उपस्थिति में की जा रही थी,
जो नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।
जिलाधिकारी द्वारा पुराने विलेख पत्र जप्त किए गए तथा कार्मिक उपस्थिति रजिस्टर भी तलब किया गया।
कार्यालय में रजिस्ट्री की नकल उपलब्ध कराने में अनावश्यक विलंब किया जा रहा था।
इसके अतिरिक्त, रजिस्ट्री शुल्क लेने के लिए पृथक व्यवस्था नहीं पाई गई तथा समस्त भुगतान एक ही काउंटर पर लिए जा रहे थे,
जो प्रक्रियात्मक त्रुटि को दर्शाता है।
निरीक्षण में यह भी पाया गया कि कार्यालय के प्रातः 9ः30 बजे खुलने के बावजूद पहली रजिस्ट्री प्रातः 11ः15 बजे की गई।
इस विलंब के संबंध में पूछे जाने पर भी उपस्थित कार्मिक कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके।
जिलाधिकारी ने सभी अनियमितताओं को अत्यंत गंभीर बताते हुए संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण तलब करने, रिकॉर्ड की विस्तृत जांच कराने तथा दोषी कार्मिकों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जनहित से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही, अनियमितता अथवा नियमों की अनदेखी कदापि बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
निरीक्षण के दौरान उप जिलाधिकारी ऋषिकेश योगेश मेहर, तहसीलदार चमन सिंह आदि उपस्थित रहे।






