हरिद्वार में गंगा में डूबते एक ही परिवार के 5 सदस्यों को बचाया
5 members of a family were rescued from drowning in Ganga in Haridwar

हरिद्वार,14 जुलाई 2025 (रजनीश प्रताप सिंह तेज़ ) : कांवड़ मेले के दौरान आज एक ऐसा मंजर देखने को मिला, जिसने हर किसी की सांसें रोक दीं.
हरिद्वार के कांगड़ा घाट पर एक ही परिवार के पाँच सदस्य गंगा की तेज धार में फंसकर डूबने लगे, लेकिन SDRF (राज्य आपदा प्रतिवादन बल) के जांबाजों ने देवदूत बनकर उनकी जान बचा ली.
यह घटना एक बार फिर दर्शाती है कि मुश्किल की घड़ी में हमारी आपदा प्रबंधन टीमें किस कदर मुस्तैद और कुशल हैं.
मौत को छूकर लौटी पांच जिंदगियां
गुड़गांव के फारुखनगर से आए इस परिवार के लिए गंगा स्नान का पवित्र अनुभव पल भर में भयावह सपने में बदल गया.
आरती (19), पलक (15), सागर (16), विशाल (18), और वीर (14) – ये पांचों युवा सदस्य गंगा की गहराई और अप्रत्याशित बहाव से पूरी तरह अंजान थे.
देखते ही देखते, वे सभी पानी के तेज़ बहाव में बहने लगे.
मौत करीब देखकर उनकी “बचाओ-बचाओ” की चीखें घाट पर गूंज उठीं
SDRF की बिजली जैसी फुर्ती
खुशनसीबी यह रही कि कांगड़ा घाट पर SDRF टीम पहले से ही हाई अलर्ट पर थी.
जैसे ही उन्होंने डूबते हुए कांवड़ियों को देखा, उप-निरीक्षक पंकज खरोला के नेतृत्व में हेड कांस्टेबल आशिक अली और कांस्टेबल नीतेश खेतवाल ने बिना एक पल गंवाए, अपनी जान की परवाह किए बिना, सीधे गंगा में छलांग लगा दी.
दूसरी ओर से, हेड कांस्टेबल विजय खरोला, कांस्टेबल कविंद्र चौहान, शिवम, अनिल और रमेश भी तेजी से तैरकर मौके पर पहुँचे.
उन्होंने कुशलता और धैर्य का परिचय देते हुए, एक-एक कर सभी पाँचों सदस्यों को ‘डग्गी’ (Lifeboat) में सुरक्षित बिठाया.
किनारे पर पहले से तैयार सहायक उप-निरीक्षक प्रविंद्र धस्माना, प्रकाश मेहता और टेक अंकित पाल ने ‘थ्रो बैग’ की मदद से रेस्क्यू टीम और बचाए गए सभी कांवड़ियों को सकुशल घाट पर खींच लिया.
कृतज्ञ परिवार ने जोड़े हाथ
गंगा के आगोश से सुरक्षित बाहर निकाले जाने पर, सभी पाँचों युवाओं और उनके साथ आए परिवार के सदस्यों (माता-पिता) ने SDRF टीम का बार-बार धन्यवाद किया.
उनकी आँखों में राहत और कृतज्ञता का भाव स्पष्ट दिख रहा था.